उसने अपनी राह चुनी

पैरों की पाजेब सिफर बनकर भी रह सकती थी 
पर उठते पैरों को हरगिज डरना तो मंजूर नहीं था 

खामोशी को उसने अपने गहनों में शुमार किया था
लेकिन कातर आंखों को चुप रहना तो मंजूर नहीं था

कई तरह के अर्थ निकाले लोगों ने उसके आंसू के
उसको अपनों की उंगली का उठना तो मंजूर नहीं था

सांसे भी चलती रहती गर वह चुप रह जाती उस दिन
घुट-घुटकर मरने की खातिर जीना तो मंजूर नहीं था

Advertisements

3 thoughts on “उसने अपनी राह चुनी”

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out / Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out / Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out / Change )

Google+ photo

You are commenting using your Google+ account. Log Out / Change )

Connecting to %s